चैंपियन हैं सम्मान पाने के हकदार

मिताली राज भारत की ही नहीं दुनिया की सबसे सफल महिला क्रिकेटरों में शुमार करती हैं। इसलिए वह जब कुछ कहती हैं तो उसके मायने होते हैं। अभी पिछले दिनों हुए महिला टी-20 विश्व कप के दौरान अपने साथ हुए व्यवहार को लेकर लगाए आरोप कष्ट पहुंचाने वाले हैं। उन्होंने टीम के कोच रमेश पोवार और बीसीसीआई की प्रशासकों की समिति की सदस्य डायना एडुलजी पर आरोप लगाए हैं कि दोनों का रवैया उनके प्रति पक्षपातपूर्ण है और वे उन्हें बर्बाद करने पर तुले हुए हैं। मिताली के आरोपों के बाद एक बार फिर यह सवाल सामने आ रहा है कि क्या हम लोग देश के स्टारों का सम्मान करना नहीं जानते हैं। अगर ऐसा होता तो सौरव गांगुली, वीरेंद्र सहवाग और लिएंडर पेस के बाद भारतीय महिला टेस्ट और वनडे टीम की कप्तान मिताली राज के साथ ऐसा व्यवहार कतई नहीं किया जाता। कोच रमेश पोवार का यह कहना कि मिताली ने पारी की शुरुआत करने के लिए ब्लैकमेल किया। यह आरोप देश की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी पर लगाना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। इस आरोप के बाद मिताली ने कहा भी कि यह मेरे कॅरियर का सबसे खराब दिन रहा।

इसमें शायद ही दो राय हों कि मिताली राज देश की सबसे सफल महिला क्रिकेटर हैं। उन्होंने 10 टेस्ट में 51.00 के औसत से 663 रन, 197 वनडे मैचों में 51.17 के औसत से 6550 रन और 85 टी-20 मैचों में 37.42 के औसत से 2283 रन बनाए हैं। इन तीनों प्रारूपों में उनके नाम आठ शतक और 72 अर्धशतक भी दर्ज हैं। यह सही है कि वह 35 साल की हैं पर उनका प्रदर्शन ढलान पर नहीं है। वह टी-20 विश्व कप के दौरान ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बाहर बैठाए जाने से पहले आयरलैंड और पाकिस्तान के खिलाफ अर्धशतक 51 और 57 रन बना चुकी थीं। वहीं इस विश्व कप में खेले एक अन्य मैच में उनकी बल्लेबाजी ही नहीं आई थी। ऐसे बल्लेबाज को पहले ऑस्ट्रेलिया और फिर इंग्लैंड के खिलाफ बाहर बैठाने का तुक किसी को भी पल्ले नहीं पड़ा। हद तो तब हो गई कप्तान हरमनप्रीत ने इंग्लैंड से बुरी तरह से हारने के बाद कहा कि उन्हें टीम प्रबंधन के फैसले पर कोई अफसोस नहीं है। यह दर्शाता है कि इन लोगों को मिताली राज बर्दाश्त ही नहीं हैं। मिताली ने कहा कि मेरे साथ अपमानित करने वाला व्यवहार किया जा रहा था। कोच रमेश पोवार के व्यवहार से लग रहा था कि उनके लिए मैं शायद टीम की सदस्य हूं ही नहीं। मैंज जब भी गलतफहमियों को दूर करने के लिए कोच पोवार के पास गई तो वह बात करने के बजाय मोबाइल को देखकर मेरी अनदेखी करने लगते थे। वह जब नेट्स पर आते और मैं बल्लेबाजी कर रही होती तो वहां रुकने के बजाय दूसरी किसी खिलाड़ी की बल्लेबाजी देखने लगते थे। मिताली ने कहा कि मुझे कभी उम्मीद नहीं थी डायना एडुलजी मेरे खिलाफ अपने पदक का दुरपयोग करेंगी। कप्तान हरमनप्रीत के कोच के फैसले का समर्थन करने पर अफसोस हुआ।

भारत के सफलतम कप्तानों में गिने जाने वाले सौरव गांगुली और टेस्ट क्रिकेट में देश के लिए दो तिहरे शतक जमाने वाले वीरेंद्र सहवाग भी कोच और अधिकारियों की ज्यादतियों का शिकार बन चुके हैं। सौरव गांगुली के साथ चैपल की पहली ज्यादती की घटना 14 दिसम्बर 2005 को नई दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान से श्रीलंका पर जीत पाकर लौटने के दौरान घटी। सौरव बस में गंभीर के साथ बैठे हुए थे। कोच ग्रेग चैपल ने गंभीर को बस आगे भेजा और खुद गांगुली के साथ बैठ गए और उनसे कहा कि आपको अगले टेस्ट की टीम में नहीं रखा गया है। इसके बाद इंग्लैंड और पाकिस्तान के खिलाफ सीरीज की टीम में भी उन्हें नहीं चुना गया। यही नहीं इससे पहले जिम्बाब्वे दौरे के बाद चैपल ने बीसीसीआई को ईमेल लिखकर कहा कि सौरव मानसिक और शारीरिक रूप से कप्तान बनने में सक्षम नहीं हैं। इस विवाद की वजह से चैपल तो गए ही पर सौरव गांगुली का कॅरियर बर्बाद कर गए। देश के एक अन्य स्टार क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग को भी प्रबंधन की बेरुखी का सामना करना पड़ा। सहवाग स्टेडियम तक दर्शनों को खींचने में सक्षम थे। उनकी इस खूबी से डीडीसीए और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की खूब जेबें भरी हैं। वैसे भी उन्होंने तमाम बड़ी पारियां खेलकर टीम इंडिया को जीतें दिलाकर देश का गौरव बढ़ाया है। लेकिन इस क्षमता वाले खिलाड़ी को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने विदाई टेस्ट तक खेलने की अनुमति नहीं दी। सहवाग ने आखिरी टेस्ट 2013 में खेला था। बीसीसीआई को चाहिए था कि वह सहवाग के साथ उनकी भविष्य की योजना पर विचार करता और एक विदाई टेस्ट आयोजित कराकर सम्मान के साथ उनकी विदाई की जाती तो सहवाग को भी लगता कि उसने देश की खातिर जो कुछ किया उसका सही सिला नहीं मिला।

यह सही है कि किसी भी टीम में खिलाड़ी के चयन का आधार उसकी प्रतिभा और प्रदर्शन होता है। यह भी सच है कि कोई भी खिलाड़ी उम्र बढ़ने पर अपना बेस्ट पीछे छोड़ता जाता है। पर लिएंडर पेस, एमसी मैरीकॉम और मिताली राज जैसे भी खिलाड़ी होते हैं, जो उम्र को पीछे छोड़ते हुए शानदार प्रदर्शन करते रहते हैं। इस तरह के खिलाड़ी राष्ट्र का सम्मान बढ़ाने में भी आगे रहते हैं। इसलिए इस तरह के खिलाड़ी आपकी योजना का हिस्सा नहीं हैं, तो उन्हें पूरे सम्मान के साथ इस सच से अवगत कराना चाहिए। ऐसा करने से देश के हीरोज अपमानित होने से बच सकेंगे। यह तब ही संभव है, जब हम हीरोज का सम्मान करना सीख लेंगे। ऐसा होने पर ही मिताली राज जैसी क्रिकेटर को इस तरह की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।

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