कांग्रेस नेताओं समेत सैकड़ों लोगों ने पर्रिकर के खिलाफ निकाला मार्च, 24 घंटे में इस्तीफे की मांग

मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर (62) के खिलाफ मंगलवार का यहां सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ताओं, कांग्रेस कार्यकर्ताओं और एनजीओ ने मार्च निकाला। इसे एनसीपी और शिवसेना का समर्थन था। ये लोग पर्रिकर के निजी निवास की ओर बढ़े लेकिन उन्हें 100 मीटर पहले ही रोक दिया गया। प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। उन्होंने अल्टीमेटम दिया कि अगले 48 घंटे में पर्रिकर अपना पद छोड़ दें ताकि फुलटाइम मुख्यमंत्री पद संभाल सके।
लोगों ने पीपुल्स मार्च फॉर रेस्टोरेशन ऑफ गवर्नेंस के बैनर तले यह मार्च निकाला। गोवा के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे ने पर्रिकर को पैंक्रियाटिक कैंसर होने की बात कही थी। 14 अक्टूबर को दिल्ली के एम्स से डिस्चार्ज होने के बाद से पर्रिकर गोवा में अपने निजी आवास पर ही रह रहे हैं।

दावा- ठप पड़ा है सरकार का कामकाज
डिप्टी कलेक्टर शशांक त्रिपाठी के मुताबिक, पर्रिकर ने तबीयत खराब होने के चलते प्रदर्शनकारियों से मिलने से इनकार कर दिया। सामाजिक कार्यकर्ता आयर्स रोड्रिग्ज ने कहा, “हमें फुलटाइम मुख्यमंत्री चाहिए। बीते नौ महीनों से सरकार का कामकाज ठप पड़ा है। मुख्यमंत्री अपने मंत्रियों और विधायकों के साथ कोई मीटिंग ही नहीं करते। हम इसलिए भी पर्रिकर के घर जाना चाहते हैं ताकि उनकी तबीयत देख सकें। अगर पर्रिकर 48 घंटे में इस्तीफा नहीं देते तो पूरे राज्य में प्रदर्शन किया जाएगा।” मार्च में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गिरीश चोडंकर, विपक्ष के नेता चंद्रकांत कावलेकर, विधायक दिगंबर कामत समेत कई नेता मौजूद थे।

सरकारी काम न रुके
गोवा यूनिट के शिवसेना प्रमुख जितेश कामत के मुताबिक, “राज्य के लोग मुख्यमंत्री के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि वह (पर्रिकर) राज्य प्रशासन का कामकाज ही रोक दें।” वहीं गोवा के सांसद नरेंद्र सवाईकर ने पर्रिकर के इस्तीफे की मांग को गलत बताया। उन्होंने ट्वीट किया, “पर्रिकर स्टेट्समैन हैं। देश के रक्षा मंत्री बनने वाले वह गोवा के पहले व्यक्ति हैं। उन्होंने कई प्रोजेक्ट शुरू किए। बिना थके वह लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने में लगे रहे। अगर वह जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे हैं तो क्या उनका इस्तीफा मांग लिया जाएगा?”

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